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Hotel Taj : भारतीयो के इस अपमान का जमशेदजी टाटा ने लिया था बदला, क्यों उन्होने ताज होटल की नीव रखी?

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Hotel Taj : भारतीयो के इस अपमान का जमशेदजी टाटा ने लिया था बदला, क्यों उन्होने ताज होटल की नीव रखी?

Hotel Taj : ब्रिटेन के फोर व्हाइट ओनली होटल (For White Only Hotel) में दाखिल हुए जमशेदजी टाटा (Jamsetji Tata) को मैनेजर ने रोक दिया था। उनके साथ एक मित्र भी थे। जब उन्होंने मैनेजर से इसका कारण पूछा तो उसका जवाब था कि – ‘भारतीयों को होटल में अंदर आने की इजाजत नहीं है’ मैनेजर के ये शब्द टाटा समूह के संस्थापक जमशेद जी टाटा (Jamsetji Tata) को सुइयों की भांति बहुत चुभे।

उन्हें यह अपना नहीं बल्कि भारत और भारतीयों (Insult of India) का अपमान लगा। इसी अपमान का बदला लेने के लिए जमशेद जी टाटा ने 1903 में ताज होटल (Hotel Taj Mumbai) बनवाया जो आज एक ब्रांड बन चुका है। ब्रांड भी ऐसा कि अब हर कोई इस होटल में ठहरने की एक चाहत रखता है, खासकर विदेशी सैलानी, लेकिन सभी की चाहत पूरी नहीं हो पाती।

Jamsetji Tata ने ये सब ठान लिया-बनाना है एक ऐसा होटल।

Britain से भारत लौटने के बाद जमशेद जी टाटा ने पहले ताज होटल की नींव गेटवे ऑफ इंडिया (Gateway of India) के सामने ही रखवाई। ऐसा कहा जाता है कि जमशेद जी टाटा को ब्रिटेन में उनके एक विदेशी मित्र ने उन्हे बुलाया था।

उस होटल में मित्र के जाने पर पाबंदी नहीं थी, लेकिन जमशेद जी टाटा को जाने से रोका गया था। इसी अपमान का बदला लेने के लिए जमशेद जी टाटा ने ठान लिया था कि वह एक ऐसे होटल का निर्माण करवाएँगे जिसमें कोई भी रह सकेगा। किसी पर कोई पाबंदी नहीं होगी। फ्रेंच शेफ, अंग्रेज बटलर जमशेद जी टाटा की ओर से खोले गए इस होटल की खासियत यह थी कि यह देश का पहला ऐसा होटल था जिसमें शेफ फ्रेंच (French Chef) थे, होटल में बटलर्स भी अंग्रेज ही रखे गए थे।

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विश्व युद्ध के दौरान ताज होटल को बना दिया था अस्पताल

ताज होटल को एक बार अस्पताल में भी बदला गया था। इतिहासकार शारदा द्विवेदी ने अपनी किताब में इसका जिक्र किया है, उन्होंने लिखा है कि पहले विश्व युद्ध के दौरान इस होटल को अस्पताल में बदल दिया गया था। इस किताब में उन्होंने यह भी बताया है कि जब ये होटल शुरु हुआ था तो इसके सिंगल रूम का किराया तकरीबन दस रुपये रखा गया था। उस वक्त डबल रूम का किराया तकरीबन 13 रुपये था।

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