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High Court Decision : लोन नहीं चुकाने वालों को  लेकर हाईकोर्ट ने जारी किए ये आदेश


यह 2015 के आरबीआई मास्टर सकुर्लर के तहत जरूरी है। जस्टिस बीपी कुलाबावाला और जस्टिस सोमशेखर सुंदरेशन की बेंच ने आईएल एंड एफएस फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड (IFIN) के पूर्व संयुक्त प्रबंध निदेशक मिलिंद पटेल की याचिका पर यह फैसला सुनाया है।
 
 लोन नहीं चुकाने वालों को  लेकर हाईकोर्ट ने जारी किए ये आदेश

Fast News24: बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay high court) ने जानबूझकर कर्ज न लौटाने वालों (विलफुल डिफॉल्टर) के संबंध में महत्वपूर्ण बात कही है। कोर्ट ने कहा है कि बैंक अथवा वित्तीय संस्थानों को किसी व्यक्ति को विलफुल डिफॉल्टर (willful defaulter) घोषित करने से पहले तर्क संगत आदेश जारी करना चाहिए।

बैंक बरते सावधानी

फैसले में स्पष्ट किया गया है कि डिफॉल्टर घोषित होने के गंभीर सिविल परिणाम सामने आते है। संक्षेप में कहे तो डिफॉल्टर घोषित होने के बाद व्यक्ति वित्तीय क्षेत्र से बाहर हो जाता है, ऐसे व्यक्ति को किसी भी बैंक या वित्तीय संस्थान से कोई सुविधाएं नहीं दी जाती है।

इसलिए बैंकों को इस संबंध में अधिकारों का इस्तेमाल सावधानी से करना चाहिए। बेंच ने कहा कि बैंक को विलफुल डिफॉल्टर (willful defaulter) घोषित करने के लिए इस्तेमाल किए गए सबूत को जान-बूझ कर कर्ज न चुकाने वाले व्यक्ति के साथ साझा करना होगा। डिफॉल्टर घोषित करने से जुड़ी प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और निष्पक्ष होनी जरूरी है। बैंक की आइडेंटिफिकेशन और रिव्यू कमिटी को तर्कसंगत आदेश की प्रति जरूरी सामग्री के साथ डिफॉल्टर को देना आवश्यक है।

पारदर्शी तंत्र स्थापित करना जरूरी

याचिका में फरवरी 2023 में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (Union Bank of India) द्वारा पारित एक आदेश को चुनौती दी गई थी। आदेश में आरबीआई के 2015 के सर्कुलर के तहत आईएफआईएन (IFIN) फर्म और उसके प्रमोटरों को विलफुल डिफॉल्टर घोषित किया गया था। बेंच ने कहा कि इस मामले में जारी आदेश में कारणों का उल्लेख नहीं किया गया है।

नोटिस में लिखी गई चीजों को फाइनल ऑर्डर में समाहित कर लिया गया है। बेंच के इस रुख को देखते हुए बैंक के वकील ने कहा कि बैंक इस केस में जारी आदेश को वापस लेगा और कारण बताओ के पड़ाव से नए सिरे से मामले की कार्यवाही को शुरू करेगा। बेंच ने कहा कि वह याचिकाकर्ता को केस के सारे दस्तावेज और सामग्री उपलब्ध कराएगा।

क्या कहता है RBI का सर्कुलर

आरबीआई (RBI) का सर्कुलर, बैंक और वित्तीय संस्थानों को हर तीन माह में विल्फुल डिफॉल्टर का डेटा जुटाने के लिए कहता है। सेबी को इस डेटा की जानकारी दी जाती है। सकुर्लर में स्पष्ट रूप से एक चेतावनी भी शामिल है, जिसके तहत बैंकों और वित्तीय संस्थानों को डिफॉल्टर घोषित करने के संबंध में पारदर्शी तंत्र स्थापित करने के लिए कहा गया है। ताकि प्रक्रिया का किसी प्रकार से दुरुपयोग न हो।