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Property Rights: ससुर की संपत्ति में बहू ले सकती है इतना हक, जानिए क्या कहता है कानून

पति या सास-ससुर की संपत्ति में पत्नी या बहू को कितना अधिकार मिलना चाहिए, यह बहस का मुद्दा है। आइये कानून में इसके नियमों को देखें। 
 
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Fast News24:  देश की माहिलाओं के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए कई कानून बनाए गए हैं। लेकिन कई महिलाओं को अपने अधिकारों का पता नहीं है। जैसा कि आप जानते हैं कि बेटा और बेटी दोनों को पिता की संपत्ति पर समान हक है, लेकिन देश का कानून सास ससुर की संपत्ति में बहू को हिस्सा देने पर क्या कहता है?

सुरक्षा अधिनियम के अनुसार, महिलाओं को अपने पति के साथ उनके घर में रहने का अधिकार है। महिलाओं को इसके अलावा मानसिक और शारीरिक हिंसा से बचने का अधिकार भी मिला है। 

सास-ससुर की प्रॉपर्टी में कितना होता है बहू का अधिकार?

कानून के अनुसार, सास-ससुर की संपत्ति पर बहू को कोई अधिकार नहीं है। वह न तो अपने सास-ससुर के जीवित रहते हुए और उनके मरने के बाद उनपर दावा कर सकती है। यह अधिकार सास-ससुर की मृत्यु के बाद उनके पति को मिलता है।  यदि पहले पति और फिर सास सौर की मृत्यु हो जाती है, तो बहू को इस संपत्ति का अधिकार मिलता है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मृत्यु से पहले सास-ससुर ने अपनी संपत्ति किसी को वसीयत के माध्यम से नहीं दी होगी। दरअसल, माता पिता की अनुमति के बिना बीटा भी उनके घर में रह नहीं सकता, और इस मामले में कानून भी मदद नहीं कर सकता। 

पति के देहांत के बाद पत्नी को कितना मिलेगा संपत्ति में अधिकार ?

जब कोई व्यक्ति मर जाता है, बिना वसीयत लिखी होने पर संपत्ति का अधिकार स्पष्ट है। उस व्यक्ति की संपत्ति माँ और विधवा पत्नी को मिलती है। यानी पति मरने पर पत्नी को उसकी संपत्ति का अधिकार मिलता है। पति की मृत्यु के बाद ही पत्नी का संपत्ति पर अधिकार होगा, लेकिन मरने से पहले पति ने वसीयत लिखी होगी, तो उसके आधार पर संपत्ति का अधिकार तय होगा। यानी, पत्नी का नाम वसीयत में नहीं होगा तो उसे उस संपत्ति पर भी अधिकार नहीं मिलेगा। तलाकी की स्थिति में या पति से अलग होने की स्थिति में, महिला को अपने पति से भरण-पोषण के लिए सिर्फ गुजारा-भत्ता मिलने का अधिकार है। यह स्पष्ट है कि वह अलग होने पर अपने पति की संपत्ति का अधिकार नहीं मांग सकती।

ससुराल की संपत्ति में अधिकार

हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 8 के अनुसार, एक महिला को अपने ससुराल की पैतृक संपत्ति में कोई हक नहीं होता जब तक कि उसका पति या सास ससुर जीवित हैं। पति की मौत पर ससुराल की संपत्ति पर उसका अधिकार है। वह अपने पति का हिस्सा पैतृक संपत्ति में पा सकती है। 1978 में, गुरुपद खंडप्पा मगदम बनाम हीराबाई खंडप्पा मगदम मामले में सुप्रीम कोर्ट ने साझा संपत्ति को लेकर एक ऐतिहासिक निर्णय भी दिया था।