Fast Newz 24


Property Rights: ससुर की संपत्ति में बहू का होता है इतना अधिकार


इसके लिए यह जरूरी है कि सास-ससुर नें संपत्ति संबंधी वसीयत बनाकर उसे किसी और को ना दिया हो. यहां तक कि बेटा भी माता-पिता के घर में तभी तक रह सकता है, जब तक कि माता-पिता की अनुमति हो. वह इसमें रहने के लिए कानूनी अधिकार का इस्तेमाल नहीं कर सकता है. यह उस स्थिति में, जब तक कि पिता ने स्वयं उक्त संपत्ति खरीदी हो.
 
ससुर की संपत्ति में बहू का होता है इतना अधिकार

Fast News24: प्रॉपर्टी को लेकर अक्सर लोगों के मन में कई सवाल होते हैं. खासकर तब, जब वह पिता या ससुर की हो. किसी भी प्रॉपर्टी (Property Knowledge) पर कौन क्लेम कर सकता है? कौन-कौन उसके हकदार हो सकते हैं…. वगैरह-वगैरह. वैसे तो बदलते हुए दौर के साथ नियम-कायदे भी अपडेट होते रहते हैं। संहिताएं भी नए दौर की जरूरत के हिसाब से बदली जाती हैं और कानून भी. संपत्ति संबंधी कानूनों को लेकर लोगों में जानकारी का अभाव होता है. अक्सर इससे जुड़ी उलझनों और जानकारी की कमी के चलते संपत्ति संबंधी विवाद भी होते हैं. आज हम आपको बताएंगे कि बहू के क्या अधिकार हैं, खासकर ससुराल के घर और संपत्ति में उसका कितना हक है. इस बारे में कानून क्या कहता है….

ये तो सभी को पता है कि सुरक्षा कानून ने महिला को पति के साथ घर में रहने का अधिकार दिया है. यह अधिकार महिला के गुजारा भत्ते और मानसिक शारीरिक हिंसा से बचाव के अधिकार के अलावा है. लेकिन पति की संपत्ति में पत्नी के अधिकारों से संबंधित मुद्दा भी संपत्ति बंटवारे से जुड़ा एक अहम मुद्दा है. पति और ससुराल की संपत्ति में पत्नी का कोई हक है या नहीं और इससे जुड़े कानूनी प्रावधान क्या हैं.

क्या है कानूनी प्रावधान

जिस व्यक्ति से महिला की शादी हुई है अगर उसके पास खुद से अर्जित की गई कोई संपत्ति है तो इसको लेकर नियम-कानून स्पष्ट हैं. व्यक्ति की खुद से अर्जित संपत्ति चाहे जमीन हो, मकान हो, पैसे हों, गहने हों या कुछ अन्य इस पर पूरी तरह से सिर्फ और सिर्फ उसी व्यक्ति का अधिकार है जिसने संपत्ति अर्जित की है. वह उस संपत्ति को बेच सकता है, गिरवी रख सकता है, वसीयत लिख सकता है यहां तक कि किसी को दान भी दे सकता है. इससे जुड़े सभी अधिकार उसके पास सुरक्षित होते हैं.

हू का सास-ससुर की संपत्ति पर अधिकार

सास-ससुर की संपत्ति (property of mother-in-law and father-in-law) पर भी सामान्य परिस्थितियों में महिला का कोई अधिकार नहीं होता है. ना ही उनके जीवित रहते और ना ही उनके देहांत के बाद महिला उनकी संपत्ति पर कोई क्लेम कर सकती है. सास-ससुर की मृत्यु के बाद उनकी संपत्ति में अधिकार महिला का ना होकर पति को मिलता है, लेकिन पहले पति और उसके बाद सास-ससुर के देहांत की परिस्थिति में संपत्ति पर महिला को अधिकार मिल जाता है.

पति के जीवित रहते संपत्ति पर नहीं कर सकती दावा-

पति के द्वारा अर्जित संपत्ति पर कोई महिला उसके जीते जी दावा नहीं कर सकती. यह पति के ऊपर निर्भर करता है कि वह अपनी संपत्ति में पत्नी को सहस्वामी के रूप में जोड़ दे. अगर पति का देहांत हो जाता है और उसने वसीयत में पत्नी का नाम नहीं जोड़ा है और संपत्ति को किसी और के नाम कर देता है तो इस स्थिति में भी पत्नी का संपत्ति पर हक नहीं रह जाता. कुल मिलाकर अपनी अर्जित संपत्ति के स्वामित्व से जुड़े सारे फैसले करने का हक पति के पास होता है.

पति के मौत पर पत्नी के संपत्ति अधिकार

संपत्ति की वसीयत लिखे बिना जब किसी व्यक्ति की मौत हो जाती है। उसकी प्रॉपर्टी पर अधिकार को लेकर कानून स्पष्ट है। इस स्थिति में व्यक्ति की संपत्ति मां और विधवा पत्नी को मिलती है। हालांकि यह जरूरी है कि व्यक्ति ने वसीयत में किसी दूसरे को अधिकार ना दिया हो।