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Property Rights : बेटे की प्रोपर्टी मां और पत्नी में से किसका होता है ज्यादा हक, जान लें कानूनी बातें


हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के अनुसार (According to Hindu Succession Act), अगर पुरुष अविवाहित है तो उसकी संपत्ति में पहली वारिस, उसकी मां और दूसरे वारिस, उसके पिता को हस्तांतरित की जाएगी.
 
 बेटे की प्रोपर्टी मां और पत्नी में से किसका होता है ज्यादा हक, जान लें कानूनी बातें

Fast News24:  भारत में संपत्ति को लेकर पर्याप्त कानून (Adequate law regarding property) हैं. इसी तरह उत्तराधिकार के कानून भी काफी स्पष्ट हैं. ज्यादातर लोग मौत से पहले ही अपनी प्रॉपर्टी के उत्तराधिकारी घोषित कर देते हैं, मतलब वे अपनी संपत्ति का बंटवारा (division of property) कर देते हैं, ताकि बाद में कोई लड़ाई झगड़ा न रहे. प्रॉपर्टी के मालिक को पूरा अधिकार होता है कि वह जिसे चाहे अपनी संपत्ति सौंप सकता है. आमतौर पर कोई शख्स अपना उत्तराधिकारी अपने बच्चों या पत्नी को ही बनाता है. लेकिन एक सवाल यह भी उठता है कि अगर उसकी मां भी साथ में ही रहती है और बगैर उत्तराधिकारी की घोषणा किए शख्स की मृत्यु हो जाए तो संपत्ति किसके पास जाएगी? मां और पत्नी में से किसका कितना अधिकार होगा?

आजकल के समय में कई कारणों के चलते मां को अपने ही बेटे की संपत्ति में अधिकार (rights in son's property) नहीं मिलते, इसलिए हर मां को अपने बेटे की संपत्ति में क्या-क्या अधिकार होते (Mother’s right on deceased son’s property), इसके बारे में जरूर पता होना चाहिए. बता दें कि बेटे की संपत्ति पर अधिकार को लेकर हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 में व्यवस्था दी गई है. इसमें लड़के के विवाहित और अविवाहित रहते मृत्यु होने पर अलग-अलग तरीके से संपत्ति का बंटवारा होता है.

क्या कहता भारत का कानून (What does Indian law say?)

कई सारे ऐसे मामले सामने आते हैं जिसमें मृत बेटे की संपत्ति में उसकी मां को हक नहीं दिया जाता है जो कानून के विरुद्ध होता है पर कई मां को इस बारे में पता भी नहीं होता है और वह अपना जीवन किसी वृद्ध आश्रम में व्यतीत करने लगती हैं लेकिन भारतीय कानून की मदद (help of indian law) से वह अपने अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ सकती हैं जिससे उन्हें अपने मृत बेटे की संपत्ति में भी अधिकार मिलेगा.

जानिए मृत बेटे की संपत्ति में मां का अधिकार

आपको बता दें कि एक मां को अपने मृत बेटे की संपत्ति में उतना ही हिस्सा मिलता है, जितना उसकी पत्नी और बच्चों को मिलता है. इसके साथ ही अगर पति की संपत्ति को बांटा जाता है तो उसकी बीवी को भी अपने बच्चों के समान ही उस संपत्ति में अधिकार (Wife’s right on husband’s property in India) मिलता है. हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम (Hindu Succession Act) की धारा 8 के अनुसार, बच्चे की संपत्ति पर माता-पिता के अधिकार को परिभाषित करती है. इसके तहत बच्चे की प्रॉपर्टी की मां पहली वारिस होती है, जबकि पिता बच्चों की संपत्ति का दूसरा वारिस होता है. यदि किसी मृत व्यक्ति की माँ, पत्नी और बच्चे जीवित रहते हैं, तो संपत्ति को माँ, पत्नी और बच्चों के बीच समान रूप से विभाजित किया जाता है.

विवाहित और अविवाहित होने की स्थिति में

 अगर मां जीवित नहीं है तो संपत्ति पिता और उसके सह-वारिसों को हस्तांतरित कर दी जाएगी. यदि मृतक एक हिंदू विवाहित पुरुष है, और बिना वसीयत के मर जाता है, तो उसकी पत्नी को हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 के अनुसार संपत्ति का अधिकार प्राप्त होगा. ऐसे मामले में, उसकी पत्नी को श्रेणी 1 वारिस माना जाएगा. वह संपत्ति को अन्य कानूनी उत्तराधिकारियों के साथ समान रूप से साझा करेगी.