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RBI New Guideline : Loan नहीं भरने वालों के लिए खुशखबरी, RBI ने जारी की गाइडलाइन

RBI New Guideline : अगर आपने भी किसी बैंक से लोन ले रखा है तो अच्छी खबर है. लोन नहीं भरने वालों के लिए आरबीआई के द्वारा गाइडलाइन जारी की गई है. तो चलिए जानते हैं विस्तार से...
 
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Fast News24: आजकल, कई लोग अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बैंक से लोन लेते हैं। दोस्तों, अगर कोई व्यक्ति समय पर EMI नहीं भर पाता है, तो बैंक उसे डिफाल्ट कर देता है। लोन लेने की जरूरत किसी को भी हो सकती है, क्योंकि ऐसे में लोन रिकवरी एजेंट्स ग्राहकों को बहुत परेशान करते हैं। ऐसा करने के लिए रिज़र्व बैंक ने नई निर्देश जारी किए हैं, जिसके तहत अब लोन नहीं भरने वालों को ये विशिष्ट अधिकार दिए गए हैं। 

बैंक या कंपनी आपको परेशान नहीं करेंगे यदि आम व्यक्ति होम लोन या पर्सनल लोन की EMI नहीं चुका सकता है। ऐसे व्यवहार पर कई नियम लागू होते हैं। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि बैंक कर्ज नहीं चुकाने पर धमका नहीं सकता। ऋण लेने के लिए आप रिकवरी एजेंटों से संपर्क कर सकते हैं।

लेकिन ये अपनी सीमा से बाहर नहीं जा सकते। ग्राहक इस तरह के थर्ड पार्टी एजेंट से बातचीत कर सकते हैं। ग्राहकों को धमकाने का अधिकार उनके पास नहीं है। सुबह सात बजे से शाम सात बजे तक वे ग्राहक के घर जा सकते हैं। वे अपने ग्राहकों को दुखी नहीं कर सकते। ग्राहक बैंक में इस तरह की दुर्व्यवहार की शिकायत कर सकते हैं। अगर कोई कार्रवाई नहीं होती तो बैंकिंग ओंबड्समैन का दरवाजा खटखटाया जा सकता है।

उन अधिकारों को जानें..

विशेषज्ञों का कहना है कि बैंकों और वित्तीय संस्थानों को कर्ज चुकाने के लिए सही तरीके अपनाना चाहिए। सिक्योर्ड लोन के मामले में उन्हें कानूनन गिरवी रखे गए माल को जब्त करने का अधिकार है। नोटिस के बिना बैंक ऐसा नहीं कर सकते।  सिक्योरिटाइजेशन एंड रीकंस्ट्रक्शन ऑफ फाइनेंशियल एसेट्स एंड एनफोर्समेंट ऑफ सिक्योरिटी इंटरेस्ट (सरफेसी) अधिनियम में कहा गया है कि कर्जदारों को गिरवी एसेट को जब्त करने का अधिकार है।

- नोटिस देने का अधिकार 

छीन लेने से आप अपराधी नहीं बन सकते और आपके अधिकार छीन नहीं जा सकते। बैंकों को आपकी संपत्ति जप्त करने से पहले आपको लोन चुकाने के लिए पर्याप्त समय देना होगा। यह एक सामान्य प्रक्रिया है। बैंक अक्सर सिक्योरिटाइजेशन और रिस्कंस्ट्रक्शन ऑफ फाइनेंशियल एसेट्स और एनफोर्समेंट ऑफ सिक्योरिटी इंटरेस्ट्स (सरफेसी एक्ट) के तहत ऐसा करते हैं।

- लोन लेने वाले व्यक्ति को तब गैर-
 
लोन लेने वाले व्यक्ति को NPA (डूबे हुए कर्ज) में डाला जाएगा अगर वह बैंक को 90 दिनों तक किस्त का भुगतान नहीं करता है। कर्ज देने वाले को 60 दिन का नोटिस देना होगा।

- बैंक एसेट की बिक्री अगर बॉरोअर नोटिस पीरियड में भुगतान नहीं कर पाता है एसेट की बिक्री के लिए बैंक को तीस दिन का अतिरिक्त सार्वजनिक नोटिस देना होगा। इसमें बिक्री जानकारी शामिल होनी चाहिए।